30 अगस्त 2012 - 19:30

यहाँ एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे का जिक्र करना चाहता हूँ. हालांकि इसका संबंध हमारे क्षेत्र से है लेकिन इसके व्यापक पहलुओं का दायरा क्षेत्र से बाहर तक फैल गया है और उसने दशकों से अंतर-राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है........

प्रिय अतिथियों!यहाँ एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे का जिक्र करना चाहता हूँ. हालांकि इसका संबंध हमारे क्षेत्र से है लेकिन इसके व्यापक पहलुओं का दायरा क्षेत्र से बाहर तक फैल गया है और उसने दशकों से अंतर-राष्ट्रीय  राजनीति को प्रभावित किया है। वह फ़िलिस्तीन का दर्दनाक मुद्दा है। इस समस्या का सारांश यह है कि एक स्वतंत्र और स्पष्ट ऐतिहासिक पहचान रखने वाला फ़िलिस्तीन नामक देश बीसवीं सदी के चालीस के दशक में ब्रिटेन के नेतृत्व में एक ख़तरनाक पश्चिमी षड़यंत्र के अंतर्गत शक्ति, हथियार, नरसंहार, धोखा धड़ी और मक्कारी द्वारा उस राष्ट्र से हड़प कर एक दल को सौंप दिया गया जिसमें अधिकांश लोगों को यूरोपीय देशों से प्रवास करवा के लाया गया था। यह ख़तरनाक गासिबाना कार्रवाई जो शहरों और गावों में निहत्थे लोगों के नरसंहार, उनके घरबार से पड़ोसी देशों की ओर उनके जबरन स्थानांनतरण के साथ अंजाम पाई, छः दशकों से अधिक की अवधि में उन्हीं आपराधिक कार्रवाईयों के साथ बदस्तूर जारी है. यह मानव समाज का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।अपहारक ज़ायोनी शासन के राजनीतिक व सैन्य नेता, इस लंबे समय में किसी भी अपराध के अंजाम देने से दूर नहीं रहे है, इंसानों के नरसंहार, उनके घरों और खेतों की विनाश व विनाश, मर्दों, औरतों यहाँ तक बच्चों की गिरफ्तारी और उन्हें दी जाने वाली यातनाओं से लेकर इस देश का अपमान और अवमानना, ज़ायोनी शासन की हराम ख़ोरी के आदी आमाशय में उसे ख़त्म कर देने के प्रयासों और फ़िलिस्तीन व पड़ोसी देशों में उनके शरण शिविरों पर हमलों तक जिनमें दसियों लाख की संख्या में आप्रवासी पनाह लिए हुए हैं, (किसी भी आपराधिक कार्रवाई से उन्होंने अपने को दूर नहीं रखा). सब्रा, शतीला, काना, देर यासीन आदि के नाम हमारे क्षेत्र के इतिहास में मज़लूम फिलिस्तीनी जनता के खून से लिखे गए हैं। आज 65 वर्ष बाद अधिग्रहीत क्षेत्रों में रह जाने वालों के खिलाफ ज़ायोनी दरिन्दों की यही आपराधिक कार्रवाई अब भी जारी है। वह लगातार नए नए अपराध कर रहे हैं और क्षेत्र को एक नये संकट का सामना करा रहे हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब लोगों के हत्या होने, ज़ख़्मी होने और गिरफ्तार कर लिए जाने की खबर न आती हो, जो अपने देश की सुरक्षा और अपनी सम्मान को दोबारा प्राप्त करने के लिए उठ खड़े हुए हैं और अपने घरों और खेतों के विनाश पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।ज़ायोनी शासन जिसने विनाशकारी युद्धों की आग भड़का कर, इंसानों का नरसंहार करके, अरब क्षेत्रों को हड़प कर और सरकारी आतंकवाद का बाजार गर्म कर दसियों वर्ष से हत्या और युद्ध की आग भड़का रखी है, फिलिस्तीनी राष्ट्र को जो अपने अधिकारों के प्राप्ति के लिए प्रदर्शन और संघर्ष कर रहा है, आतंकवादी बताते है और जायोनियों से जुड़े चैनल और बिका हुआ पश्चिमी मीडिया भी अपने नैतिक दायित्वों और मीडिया के सिद्धांतों को पामाल करते हुए केवल झूठ दोहराते हैं। मानवाधिकार के दावे करने वाले राजनीतिक नेता भी इन सभी अपराधों पर अपनी आँखें बंद किए हुए हैं और किसी भी शर्म महसूस किए बिना इस ज़ालिम सरकार के समर्थक व सपोर्टर बने हैं और उनके वकील व संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।हमारा कहना यह है कि फ़िलिस्तीन, फ़िलिस्तीनियों की संपत्ति है और इस पर लगातार क़ब्ज़ा बहुत बड़ा और बर्दाश्त न किये जाने वाला अत्याचार और विश्व शांति एंव सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। फ़िलिस्तीन के समाधान के लिए पश्चिमी देशों और उनसे जुड़े लोगों ने जितने भी सुझाव दिये हैं सब गलत और असफल साबित हुये है और आगे भी यही होगा। हम बहुत उचित और मुकम्मल लोकतांत्रिक रास्ता बता रहे है कि सभी फिलिस्तीनी चाहे वहाँ के वर्तमान निवासी हों या वह लोग जिन्हें अन्य देशों की ओर जबरन प्रवास करवा दिया गया है और जो अब तक अपनी फिलिस्तीनी पहचान बनाए हुए है, वह मुसलमान हों, यहूदी या ईसाई, सब देखरेख में अंजाम पाने वाले संतोषजनक चुनाव में भाग लें और देश की राजनीतिक व्यवस्था के ढांचे का चयन करें, सभी फिलिस्तीनी जो वर्षों से वतन से दूरी का दुख झेल रहे हैं अपने वतन लौटें और सार्वजनिक जनमत संग्रह में शामिल हों कर और उसके बाद संविधान में परिवर्तन के लिए चुनाव में भाग लें. तभी क्षेत्र में शांति स्थापित हो सकती है।यहां मैं अमेरिकी राजनेताओं को जो हमेशा ज़ायोनी शासन के संरक्षक के रूप में मैदान में उपलब्ध रहे हैं, एक सलाह देना चाहूँगा। इस सरकार ने अब तक आपके लिए अनगिनत संकट खड़े किए हैं, क्षेत्र के राष्ट्रों में आपके प्रति नफ़रत पाई जाती है और आप उनकी आँखों में अपहारक जायोनियों के अपराधों के हिस्सेदार है। हालिया कुछ वर्षों के दौरान इस रास्ते पर चलने के कारण अमेरिकी सरकार और जनता को जो भौतिक और नैतिक घाटा उठाना पड़ा है वह चौंका देने वाला है और शायद अगर भविष्य में भी यही तरीक़ा जारी रहा तो और भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। आइए! जनमत संग्रह के लिए इस्लामी गणतंत्र के प्रस्ताव पर विचार करिए और हिम्मत से फ़ैसला लेकर खुद को कभी नहीं हल होने वाली इस गुत्थी से नेजात दिलाईये! निश्चित रूप से क्षेत्र की जनता और संसार के सभी स्वतंत्र इंसान इसका स्वागत करेंगे।